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आन्तरिक सुरक्षा अकादमी

 

"ज्ञानेन साध्यते शक्तिः” मोटो ही अकादमी का एकमात्र उद्देश्य है। अकादमी द्वारा अधिकारियों कें पेशेवर ज्ञानकौशल एवं व्यवहार को बढ़ाने के साथ ही बेहतर नैतिक मूल्यों और मापदंडो के विकास के साथ उनको राष्ट्र की बेहतर सेवा करना ही मुख्य प्रयास है।

माउंट आबूः-

        व्यवहार को बढ़ाने समुद्रतल से 1220 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माउंट आबू राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन है जिसे "ज्ञान की पहाड़ी” या "संतों का शिखर” भी कहा जाता है। यहां महत्वपूर्ण हिन्दू एवं जैन धर्मो का प्रमुख तीर्थस्थल स्थित है। दिलवाड़ा मंदिर का निर्माण 11वीं सदी से 13वीं सदी के बीच सफेद मार्वल से हुआ था। ऐसा माना जाता है कि नक्की झील का निर्माण देवताओं के नाखून के द्वारा हुआ है। "ब्रह्मा कुमारी विश्व आध्यात्मिक केन्द्र” भी इसी शहर में स्थित है। इसके अतिरिक्त इस शहर में अनेकों मंदिरविभिन्न दर्शनीय स्थलउधान और पिकनिक स्पॉट है।

परिचयः-
         आन्तरिक सुरक्षा अकादमी की स्थापना 01 फरवरी 1975 को माउंट आबू (राजस्थान) में केन्द्रीय पुलिस प्रशिक्षण कॉलेज (अब सरदार बल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी) के हैदराबाद स्थानान्तरित होने के बाद की गई थी। इसकी सभी संपत्तियॉ सरदार बल्लभ भाई पटेलराष्ट्रीय पुलिस अकादमी द्वारा के.रि.पु.बल को स्थानान्तरित हुई थी। मुख्य भवनजिसमें मुख्य अकादमी परिसर स्थित हैजिसे 4.5 एकड़ में स्थित पूर्व के आबू लॉरेंस स्कूल के नाम से भी जानते हैको केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल द्वारा 1979 में रुपये 6,85,000/- की लागत से खरीदा गया।

निर्माण का इतिहासः-

         1849 में निर्मितआबू लॉरेंस स्कूल को मेजर जनरल एम.एम.  लॉरेंसके.सी.बी. द्वारा स्थापित किया गया था। (सन 1853 से 1857 तक राजपूताना में गवर्नर जनरल के लिए एजेंट) उनका निधन दिनांक 04 जुलाई 1857 को हुआ था। उनकी अंतिम इच्छा के अनुरुप आबू लॉरेंस शरण और आबू लॉरेंस स्कूलईस्ट इण्डिया कम्पनी को समर्पित की गई थी जहॉ उन्होंने 35 वर्षो से ज्यादा अपनी सेवायें दी। स्कूल की इमारत बाहर स्थित कार्यालयों सहित कुल रु 10,000/- की लागत से बनाए गये थे।

         स्कूल का आदर्श वाक्य(मोटो) "हार कभी नही” था जिसे 30 दिसम्बर 1950 को बंद कर दिया गया था। मुख्यतः अच्छे माहौल में स्कूल में अनाथ और सैनिको के बच्चों को शरण और व्यावहारिक शिक्षा प्रदान की जाती थी।

         आबू लॉरेन्स स्कूल सह-शैक्षिक संस्थान था जिसमें 48 लड़के एवं 32 लड़कियों के लिए आवास उपलब्ध था और आंशिक रुप से शाही फण्डों और आंशिक रुप से निजी सदस्यता फीस और निधि से प्राप्त व्याज से स्कूल को चलाया जाता था। स्कूल के प्रबंध के पादरीसैनिटोरियम के कमाण्डेंटस्टेशन अस्पताल के कमाण्डिंग ऑफिसर और आबू के मजिस्ट्रेट शामिल थे। यूरोपियन स्कूलबॉम्बे और सेन्ट्रल इण्डिया के इन्स्पेक्टर समय-समय पर लगातार स्कूल का दौरा करते रहते थे। स्कूल के कर्मचारियों में एक हेडमास्टरएक स्कूल शिक्षिका और तीन सहायक शिक्षक शामिल थे। पॉच और बारह वर्ष की उम्र के बच्चों को भर्ती और सोलह वर्ष में वापस लिया जाता था।

         स्कूल में प्रवेश के लिए मूल यूरोपीयन पितृत्व के बच्चों को  मिश्रित पितृत्व के बच्चों में से उनको वरीयता दी जाती था। दानकर्ता प्रवेश हेतु बच्चों को मनोनीत कर सकता था। स्कूल में सेना के रैंक के अनुरुप शिक्षण शुल्क था। पेंशनयाप्ता सैनिको से कोई फीस नही लिया जाता था।स्कूल में प्रवेश हेतु बापटिज्म प्रमाणपत्र आवश्यक था। स्कूल से वापसी हेतु 14 दिन का अग्रिम नोटिस आवश्यक था।

         प्रथम विश्व युद्ध(1914-1918) के बाद ईस्ट इण्डिया कंपनी युद्ध के दौरान मारे गये सैनिकों के बच्चों को आबू लॉरेंस स्कूल में शिक्षा प्रदान किया गया। 15 सितम्बर 1948 को माउंट आबू में भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों के लेए प्रशिक्षण महाविधालय स्थापित किया गया था। प्रारंभ मेंकॉलेज सेना के बैरकों में था।

स्कूल भवन परिसर में अपने कार्यालयक्लास रुमलाइब्रेरी और राजपूताना होटल आवास को अधिकारियों के लिए मेस बनाया गया था। केन्द्रीय पुलिस प्रशिक्षण कॉलेज के नामकरण एस.वी.पी. राष्ट्रीय पुलिस अकादमी के रुप में होकर हैदराबाद स्थान्तरित होने के उपरांत दिनांक 01 फरवरी 1975 में इस परिसर में आन्तरिक सुरक्षा अकादमी की स्थापना हुई थी।

आन्तरिक सुरक्षा अकादमी के मिशनः-

         आंतरिक सुरक्षा अकादमी का प्राथमिक मिशन है अधिकारियों को निभाना साथ ही अन्य सौपे गए जिम्मेदारियों को नियत समयसमर्पण और लोगों की सेवा करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ उनको तैयार करना है। अकादमी का लक्ष्य संस्थान के गुँवत्ता प्रबंधन के साथ ही अधिकारियों को उच्च गुणवत्ता के साथ प्रशिक्षण प्रदान करना है। अधिकारियों को बहतर प्रशिक्षणपेशेवर ज्ञान और कौशलमानवीय मूल्यों और मानदंडों के साथ प्रदान करने कहेतू अकादमी लगातार प्रयासरत है ताकि वो राष्ट्र की सेवा और बेतर तरीके से करने में सक्षम हो। अकादमी प्रशिक्षण एवं अनुसंधान के लिए "उत्कृष्टता का केन्द्र” है एवं अधिकारियों में जबावदेहीप्रतिबद्धता,जागरुकतावैज्ञानिक तकनिकी और जबाबदारी लाने हेतु लगातार प्रयासरत है।

        आ.तरिक सुरक्षा अकादमी आपरसी समन्वय और सहयोग को र्नकौशल और व्यवस्थाओं की मूल दक्षताओं के साथ विकसित कर अधिकारियों को वर्तमान में बदलते सामाजिकराजनीतिक और आर्थिक परिवेश के अनुरुप उन्हें प्रशिक्षित कर रहा है साथ ही उन्हें मानव अधिकारकानून और न्यायव्यावसायिकता के उच्च मानकों के साथ शारीरिक कर रहा है। अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान नवीनतम प्रशिक्षण सुविधाओं और जरुरत के अनुसार संदर्भ से अधिकारियों को आत्मसात करवा जाता है। अकादमी के.रि.पु. बल के अधिकारियोंकेन्द्रीय पुलिस संगठनोंभारतीय पुलिस सेवा और अन्य केन्द्री/राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए म्ख्य केन्द्र बिन्दु है। यहॉ पआशिक्षण हेतु एक आदर्श वातावरण और सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक माहौल को संवेदनशीलता के साथ प्रदान किया जाता है। अकादमी ने बदलते परिवेश के अनुसार ढ़लकर प्रशिक्षण हेतु नित्य नये आयाम को अपना कर एवं जरुरत अनुसार देश व विदेश स्थित अन्य प्रशिक्षण संस्थों के साथ मिलकर अपने संसाधनों का विस्तार किया है। अकादमी ने प्रशिक्षण हेतु एक सही दऋष्ट और अपरने प्रशिक्षु अधिकारियों को सही नैतिक मूल्यों को निभाने में एक सक्रिय भूमिका निभा रहा है। अकादमी को प्रशिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र  में सच में प्रेरणादायक उत्कृष्टता हैतु सदैव प्रयासरत है।

आंतरिक सुरक्षा अकादमी की भूमिकाः-

  आन्तरीक सुरक्षा अकादमी की भूमिकाऐ निन्नलिखित हैः-

1.   राष्ट्रीय स्तर के एक प्रमुख अकादमी के रुप में कार्य करना जिसके अन्तर्गत सभी राज्य पुलिस और केन्द्रय पुलिस संगठनों के लिए आंतरिक सुरक्षा पाठयक्रमों का आयोजन करना।

2.   केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के प्रशिक्षण हेतु एक उच्च् स्तरीय प्रशिक्षण केन्द्र के रुप में कार्य करना और के.रि.पु. बल  एवं अन्य संगठनों के राजपत्रित अधिकारियों के लिए विभिन्न सेवाकालीन पाठ्यक्रम का आयोजन करना ।

3.   राष्ट्रीय स्तर की अकादमी के रुप में कार्य करते हुए समय-स्य पर भारत सरकार के निर्णयोंनुसार वरिष्ठ अधिकारियों/केन्द्रीय पुलिस संगठनों के अधिकारियों एवं अन्य संगठनों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन करना।

4.   आन्तरिक सुरक्षा के मामलों पर "उत्कृष्टता का केन्द्र” के रुप में कार्य करना और पुलिस से संबंदित विभिन्न विषयों पर अनुसंधान एवं विकास करना।

5.   आंतरिक सुरक्षा एवं अन्य संबंध विषयों के मामलें के अध्ययन हेतु स्टोर हाउस के रुप में कार्य करना।

   उद्देश्यः-

      आन्तरिक सुरक्षा अकादमी को निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए स्थापित किया गया थाः-

1.   केन्द्रीय पुलिस संगठनोंराज्य पुलिस के अधिकारियों और कार्यपालक मजिस्ट्रेट के लिए आन्तरिक सुरक्षा पाठ्यक्रमों और सेमिनार आयोजित करना।

2.   के.रि.पु.बल अधिकारियों के राजपज्ञित अधिकारीयों के लिए सेवाकालीन पाठ्यक्रम का आयोजन।

3.   के.रि.पु.बल के चिकित्सा अधिकारियों के लिए कॉम्बेटाइजेश कोर्स का आयोजन।

4.   के.रि.पु.बल के विभागीय एंट्री राजपत्रित अधिकारियों के लिए बेसिक पाठ्यक्रम का आयोजन।

 

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